Sunday, November 18, 2007

ब्लॉग बड़ा है अच्छा...

काफी कुछ चलता रहता है...
इस दिमाग़ में,
कुछ बुरा
और कुछ अच्छा..
कुछ अच्छे लोगों की संगत में...
सोचा मैं भी बन जाऊं अच्छा...
मिला ब्लॉग का ग्यान एक दिन...
सोचा ये है सबसे अच्छा...
जो सोचा कि वो है अच्छा...
ब्लॉग पे लिख कर रख छोड़ा उसको...
बिन सोचे कुछ बुरा या अच्छा...
बहुत गुणीं हैं ब्लॉग वर्ल्ड में...
ये निर्णय है छोड़ा उन पर...
कमेंट मिला तो और लिखूंगा...
क्रिटिक मिले तो सबसे अच्छा...
नहीं पढ़ा गर मुझे किसी ने...
तो समझूंगा ये है सबसे अच्छा.

2 Comments:

At August 25, 2008 at 10:03 AM , Blogger Asha Joglekar said...

Aisa na sochen likhate rahiye padhane wale jaroor ayenge. ye bat aapki sahi hai ki aye to achcha na aaye to aur bhi achcha.

 
At May 27, 2009 at 10:56 PM , Blogger संगीता पुरी said...

अच्‍छा है .. पर जारी रखें।

 

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